GunD@Y ¤f LaKh¡$@rA! <3<3

आतंकी भाईजान जी,
अम्मी हमेशा कहा करती थीं कि बड़ों को इज्जत देनी चाहिए. नाम के आगे जी लगाकर ही बात करनी चाहिए. सलीका यही है. अम्मी अब्बा की हर बात याद है. मंगलवार को सुबह सोकर उठा तो सर्दी में स्कूल जाने का मन नहीं किया. पर अम्मी बोलीं कि स्कूल जाओगे तभी जिंदगी में कुछ बन पाओगे. अम्मी की बात ठीक भी निकली और पता है भाईजान, स्कूल पहुंचने के चंद पलों बाद मैं कुछ बन गया. अम्मी तुम भी सुनो, मैं लाश बन गया. अम्मी की बातों पर मेरा यकीन बढ़ाने के लिए नकाबपोश आतंकी भाईजान शुक्रिया. शुक्रिया मुझे लाश बनाने के लिए भाईजान.
अब मुझे सुबह उठना नहीं होगा. लेकिन भाईजान आप अम्मी को समझाओ न. अम्मी रो क्यों रही हैं. सुबह जब तैयार होकर मैं घर की चौखट को पार कर रहा था, तब तो अम्मी मुस्कुरा रही थीं, लेकिन अब. मुझे सोता देख अम्मी और अब्बा सब रो क्यों रहे हैं. पहले तो जब-जब मैं सोता था वो कभी आकर मेरा माथा चूमते तो कभी आंख चूमते. लेकिन आज, ये लगातार रो क्यों रहे हैं. अब समझा भाईजान, सब आपकी जल्दीबाजी की वजह से हो रहा है. क्या जरूरी था मेरी आंखों और चेहरे पर गोली मारना. देखो कितना खराब सा लग रहा है मेरा गुलाबी चेहरा. खून से सना और गोलियों के गड्ढों से फटा सा. छी, मुझे नहाना पड़ेगा अब इसे साफ करने के लिए. शायद इसी वजह से तो मेरी अम्मी जी मुझे आज चूम नहीं रही हैं. बस रो रही हैं वो भी मेरे चेहरे को न देखते हुए. क्या भाईजान, जाओ कट्टी. अम्मी की चुम्मी भी नसीब नहीं होने दी आपने. खैर छोड़ो, जाओ माफ किया भाईजान. आप भी क्या याद रखोगे. अम्मी कहती हैं, ज्यादा देर तक किसी से लड़ना नहीं चाहिए. माफ कर देने में और प्यार से रहने में ही सब की भलाई है. एक बात बताओ भाईजान, आपकी अम्मी नहीं हैं क्या. तभी तो आपको किसी ने प्यार करना नहीं सिखाया और आप मेरे स्कूल पहुंचकर सुबह-सुबह हम बच्चों से ही बंदूकों से लड़ने लगे. माना गलती होती है हमसे ज्यादा. पर उसके लिए बंदूक चला दी. क्या आतंकी भाईजान, आप कब बचपना छोड़ बड़े होंगे. पता है भाईजान, आप उस वक्त स्कूल के दरवाजे पर होंगे, जब मैं क्लास में बेंच पर आगे बैठे लड़के से कह रहा था कि आज आधी छुट्टी में क्रिकेट खेलेंगे. तुम शोएब बनना और मैं इंजमाम. भाईजान मुझसे दौड़ा नहीं जाता न, इसीलिए सब मुझे इंजमाम कहकर चिढ़ाते हैं. पर मैं चिढ़ता नहीं हूं भाईजान, अम्मी की प्यार से रहने वाली बात याद है मुझे. सच्ची भाईजान. तभी तो जब आप मेरे आगे के बच्चों के सिर में बंदूक की गोली घुसा रहे थे, तब मैं भाग नहीं पाया. लगता है दोस्तों ने मेरा इंजमाम नाम सही ही रखा था.जैसे-तैसे करके उस वक्त आपसे बचकर भाग लिया होता तो आज अम्मी की चुम्मी मिल जाती भाईजान. ऐ भाईजान सुनो, डर लग रहा है ये अम्मी चुप हो जाएंगी न. एक बार हमारा कोई रिश्तेदार मर गया था और वो रिश्तेदार भी मेरी तरह सो रहा था. तो अम्मी कई दिनों तक रोती रही थीं और अब्बा भी. अम्मी की चीख सुनकर मेरे छोटे से सुनहरे रोएं खड़े हो गए थे. वो तो भला हो आपका भाईजान, जो आज आपकी वजह से मेरे सारे रोएं खून से सन कर खाल से चिपक गए हैं. वरना जैसे ही मुझे सोता देख अम्मी चीखीं थीं, जरूर मेरे रोएं उसी दिन की तरह खड़े हो जाते. भाईजान, आपके और आपके दोस्तों और स्कूल(आतंकी संगठन) के साथियों के रोएं खड़े नहीं हो रहे हैं क्या. देखो न, मेरे कितने दोस्तों की अम्मियां चीख रही हैं. चिल्ला रही हैं. इन चीखों को सुनकर आपके रोएं खड़े नहीं होते हैं क्या भाईजान. जरूर मेरे और मेरे दोस्तों के खून के छीटें प़ड़ गए होंगे आप लोगों के बदन के रोएं पर. तभी तो आप मेरे और मेरे 131 दोस्तों की अम्मियों की चीख को जिस्मानी तौर पर महसूस नहीं कर पा रहे हैं. पता है भाईजान, जैसे आप बीच में अल्लाह-अल्लाह कर रहे थे. वैसे अम्मी भी दिन में पांच मर्तबा नमाज पढ़ते हुए अल्लाह को याद करती हैं. अम्मी थोड़ी लालची हैं भाईजान, अल्लाह से हमेशा कहती रहती कि मेरे चांद से बच्चे को बुरी नजर से बचाना अल्लाह. लेकिन अल्लाह लालची लोगों को पहचानता है भाईजान, तभी तो उसने आप वाले अल्लाह से सेटिंग करके मेरी नजरें(आंखें) ही खूनम-खून कर दी. अब तो आंखों से बहे खून से निकले थक्के से अम्मी के हाथों पर पपड़ी सी जम गई है खून की. पता है भाईजान, इन्ही हाथों से अम्मी अपने वाले अल्लाह से मेरी जिंदगी की दुआएं मांगती थीं भाईजान. भाईजान अब सर्दी हो रही है तो मुझे सोना है. मैं सो जाऊं तो मेरी अम्मी और इन बाकी अम्मियों को चुप करा देना. मुझे तरस सा आ रहा है अब, ठीक है भाईजान. अच्छा सुनो आतंकी भाईजान जी, बस एक बात बताते जाओ, ये अम्मी वाला अल्लाह और आपका अल्लाह अलग-अलग है क्या?, क्योंकि.... अपनी अम्मी का छोटा सा क्यूटीपाई
नन्ही लाश