Kashyap Mahasangh

दोस्तों, "कश्यप महासंघ" ग्रुप के लेकर बहुत से प्रश्न, इस ग्रुप से जुडे सदस्यो के जहन में है |

कश्यप् समाज की समस्त भारत में लगभग 14 करोड़ आबादी का 140 से भी ज्यादा जातियों और उप-जातियों जैसे : कश्यप, निषाद, कहार, कश्यप राजपूत, धीवर, झिन्वर, मेहरा, केवट, मल्लाह, धुरिया, डोंगरा, साहानी, रायकवार, बाथम, तुराहा, कीर, गौर, मांझी, एकलव्य आदि, वाला समाज है जो भारत के हर राज्य में अलग पहचान रखता है | इतनी बड़ी आबादी का समाज होने के बाद भी हम सामाजिक और राजनैतिक उपेक्षा का शिकार है | बेरोजगारी, शिक्षा के अभाव में समुदाय की हालत और भी खराब हो रही है|

हमारा समुदाय का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि धरती पर जीवन और जीव की सरचना की उत्पति | हर युग में हमें एक नया नाम मिला, हमारा अस्तित्व रामायण काल से पहले भी था और रामायण काल में भी था और महाभारत काल में भी | हर युग में हमने समाज की सेवा की है |

ऋषि कश्यप के नाम पर गोत्र का निर्माण हुआ है यह एक बहुत व्यापक गोत्र है जिसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति को अपना गोत्र का ज्ञान नहीं होता तो वो कश्यप गोत्र का मान लिया जाता है, क्योंकि एक परंपरा के अनुसार सभी जीवधारियों की उत्पत्ति महाऋषि कश्यप से हुई, मानी गई है और इस कारण महाऋषि कश्यप को सृष्टि का जनक माना गया है | वेदों में पुरानो में हमे मह्रिषी कश्यप को हमारा पूर्वज बताया गया है | हमारा अतीत कुछ भी हो, पर आज हमारी पहचान "कश्यप्" सरनेम से हो रही है

हमारा मानना है कि इस ग्रुप से जुड़ा हर सदस्य ही “कश्यप् महासंघ”है और इसका गठन भी कुछ दोस्तों द्वारा समुदाय की वर्तमान स्तिथि पर व्यथित होकर किया है | उन दोस्तों और एडमिन ग्रुप ने मिलकर निर्णय लिया कि सर्वप्रथम एक "संगठनात्मक विचार मंच" बनाया जाए जिसका मूल उददेश्य समस्त कश्यप समुदाय का सामाजिक विकास, राजनैतिक सशक्तिकारण और इतिहसिक प्रचार-प्रसार करके मंथन-चिंतन करना हो | हमारा यह ग्रुप किसी भी राजनैतिक दल या व्यक्ति का समर्थन या विरोध नही करते है, सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने समुदाय के विकास और एकजुटता के लिए बनाया है |

हमारी सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हमारे समुदाय के स्वर्णिम इतिहास को इस कदर तहस-नहस कर दिया है कि हमारे लोग अपने समुदाय और गुरु-महात्माओ को लेकर हमेशा संक्षय में रेह्ते है और अपने बारे में अन्य समाज के लोगों को बताते हुए हीन मेह्सुस करते है | इसी झिझक को खत्म करने और अपने स्वर्णिम इतिहास को लोगों के सामने लाने के लिए "कश्यप् महासंघ" के रुप में हमारा यह छोटा सा प्रयास है |

दोस्तों ! समाज जुड़ने से बनता है न की अलग अलग चलने से, आज हमे आज जो पहचान मिली है, उसी का अनुसरण करते हुए आगे बढना चाहिए और अपने बिखरे हुए समाज को एक सूत्र में जोड़ना चाहिए, ताकि दुसरे समाज की तरह हमारा विशाल समुदाय भी एकसूत्र में बधकर अच्छी तरह से फल-फूल सके और अपने इतिहास की नींव पर अपने वर्तमान और भविष्य की ईमारत को मज़बूत बनाए |
जय कश्यप्, जय कालु |

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