YUVA BHARAT

भगत सिंह लिखते है देश के युवाओं को उनकी शक्ति का अहसास करवाते हुए कहते है कि ‘ युवा अवस्था मानव जीवन का वसंत काल है ,उसे पा कर मनुष्य मतवाला हो जाता है ऐसा लगता हे जैसे बड़ा गहरा नशा छा गया हे,युवा अवस्था ऐसी है जिसमे विधाता की दी हुई सारी शक्तियां सहस्त्र धाराएँ बन कर फुट पड़ती हैं,मतवाले हाथी की तरह निरंकुश , तूफानी वर्षा की तरह प्रचंड युवा अवस्था होती है, ज्वाला मुखी की तरह उछलंख , भैरवी संगीत की तरह मधुर , उज्जवल प्रभात की शोभा, संध्या की बेला , चंद्रमा की शीतलता , जेठ की तपती दुपहरी का ताप युवा अवस्था के भीतर ही है.युवा अवस्था ऐसी है जैसे किसी क्रांतिकारी की जेब में फटने को तैयार बंब का गोला. भगत सिंह आगे कहते है कि युवा अवस्था ऐसी है जैसे किसी क्रांतिकारी कि जेब मैं भरी हुई शत्रु के सीने में गोलियां उतरने के लिए तैयार पिस्टल... भगत सिंह आगे कहते हैं कि युवा अवस्था ऐसी है जैसे युद्ध क्षेत्र मैं खड़े हुए वीर के हाथ मैं शत्रु का शीश काटने के लिए तलवार, भगत सिंह आगे कहते हैं कि ये जो युवा अवस्था के ये जो 16 से 25 वर्ष कि आयु है , ये जो 10 वर्ष है ये अनमोल हैं यह हमैं जीवन में दोबारा नहीं मिलते और इन 10 वर्षों मैं भगवान , ईश्वर , विधाता संसार का सारा साहस युवक के शरीर मैं डाल देता है , हाड़ मांस के पुतले मैं बंद कर देता है...... भगत सिंह आगे कहते हैं कि 16 से 25 वर्ष कि आयु में कोई व्यक्ति बड़ा कार्य नहीं कर सकता तो वह जीवन मैं कभी कोई बड़ा कार्य नहीं कर पाएगा. भगत सिंह आगे युवकों को उनकी शक्ति का अहसास करवाते हुए कहते है कि युवा अवस्था देखने मैं तो सश्यशामला वसुंधरा से भी शीतल है ,सुंदर है लेकिन उसके अंदर भूकंप कि भयंकरता छुपी हुई है, युवा अवस्था के बारे मैं आगे भगत सिंह सचेत भी करते हैं -वो कहते हैं कि युवा अवस्था मैं व्यक्ति के सामने दो ही मार्ग हैं – वह चाहे तो उन्नति के शिखर पर चढ़ सकता है और अगर वो गिरना चाहे तो गहरी खाई मैं गिर सकता है... युवक चाहे तो त्यागी बन सकता है चाहे तो विलासी बन सकता है, युवक चाहे तो देवता बन सकता है, युवक चाहे तो पिशाच बन सकता है , युवक चाहे तो आतंकवादी बन कर सारे संसार को भयग्रस्त कर सकता है. युवक अगर ठान ले तो योद्धा बन कर अपने राष्ट्र की रक्षा कर सकता है. भगत सिंह आगे कहते हैं की सारे संसार मैं युवक का साम्राज्य है।युवक के कीर्तिमानों से सारा इतिहास अटा पडा है, युवक रणचंडी के ललाट की रेखा है. युवक स्वदेश के यश की दुदुंभी है ,युवक ही स्वदेश का मेरु दंड है। भगत सिंह आगे कहते हैं कि युवक महाभारत के भीष्म पर्व की पहली ललकार के समान विकराल है. युवा अवस्था भक्त प्रहलाद के सत्यागृह की तरह दृढ़ और अटल है. भगत सिंह आगे कहते हैं कि किसी को बड़े दिल विशाल हृदय कि आवश्यकता हो बलिदान कि आवश्यकता हो तो उसे युवकों का दिल टटोलना पड़ेगा. भगत सिंह आगे कहते हैं अगर किसी को आत्म त्यागी वीर की आवश्यकता हो, किसी को राष्ट्र की रक्षा हेतु सेना बनाने के लिए योद्धाओं की आवश्यकता हो तो उसे युवको से मांगना पड़ेगा ,युवकों के सिवा और कहीं बलिदानी वीर नहीं मिल सकते. भगत सिंह आगे कहते है कि भगवान की अद्भुत रचना है युवक -युवक का उत्साह विचित्र होता है वह निश्चिंत है वह असावधान है वह बेपरवाह है, वह एक बार लगन लगा ले, एक बार संकल्प कर ले तो रात रात भर जागना उसके लिए बाएँ हाथ का खेल है, मीलों दूर तक पैदल चलना उसके दाएँ हाथ का खेल है, वह चाहे तो अपने देश और अपनी जाति को इतना ऊपर उठा दे , वह चाहे तो बड़े बड़े साम्राज्यों को गिरा दे , पतितों के उत्थान और संसार के उद्धार के सूत्र युवकों के ही हाथ मैं है.....अगर रक्त की भेंट चाहिए तो युवक के सिवा कोई और नहीं दे सकता , अगर तुम् बलिदान चाहते हो तो तुम्हें युवक की और देखना होगा . प्रत्येक राष्ट्र व जाति का भाग्य विधाता युवक ही होता है. यह शहीद भगत सिंह ने आज से 87 साल पहले लिखा, शहीद भगत सिंह आगे कहते है कि सारे इतिहास के पन्नो को पलट कर देख लिजिए जितनी भी क्रांतियाँ हुई है वो सारी क्रांतियों का इतिहास युवकों के रक्त से लिखा गया है उनके बलिदान से लिखा गया है. सच्चा युवक – युवक की पहचान क्या है ? आगे भगत सिंह कहते हैं कि 16 से 25 वर्ष का हर युवक सच्चा युवक नहीं होता, सच्चे युवक की पहचान क्या है ? तो भगत सिंह कहते हैं कि सच्चा युवक बिना किसी भय के मृत्यु का आलिंगन करता है, सच्चा युवक संगीनों के सामने बैठ कर गीत गा सकता है , सच्चा युवक तोप के सामने आफ्ना सीना खोल कर रख सकता है, सच्चा युवक बेड़ियों की झंकार पर राष्ट्र गान गाता है, सच्चा युवक जेल की चक्की को पिसते हुए ऊदबोधन के मंत्र सुनता है, सच्चा युवक जेल की कल कोठरी के अंधकार मैं रहता हुआ स्वयं की युवा अवस्था की आहुती देता हुआ आपने राष्ट्र को अंधकार से निकलता है , आगे भगत सिंह युवाओं से आव्हान करते हैं -1925 मैं जो उन्होने आव्हान किया वो आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक है। तो भगत सिंह युवाओं से आव्हान करते हुए कहते हैं कि हे भारतीय युवक तू क्यों गफलत की नींद मैं बेखबर सो रहा है तू उठ आँखें खोल देख पूर्व दिशा से सूर्य उठ रहा है अब और अधिक मत सो और यदि सोना है तो मृत्यु के आगोश मैं सो कायरता की गोद मैं क्यों सोता है ? उठ मोह ममता को त्याग कर खड़ा हो जा तेरी माता तेरी प्रात: स्मरणीय तेरी परम वंदनीय तेरी जगदंबा , तेरी अन्नपूर्ना , तेरी त्रिशूल धारणी, तेरी सिंह वाहनी , तेरी सष्यशामला, तेरी भारत माता आज घायल पड़ी फुट फुट कर रो रही है अगर तेरे दिल मैं थोड़ी भी शर्म बाकी है तो उठ कर खड़ा हो जा और अपने माँ के दूध की लाज रख !!!

आज फिर करतार सिंह साराभा जैसे क्रांतिकारियों की आवश्यकता है जो लोगों में भगत सिंह बनने का ज़ज्बा पैदा कर सकें ....


वही सफ़े हैं वही स्याही और दरों दीवार

तेरी इबारत का पूरा होना अभी बाकी है,

किससे कहूँ ओ भगत सिंह-ओ भगत सिंह

तेरे सपनों का भारत होना अभी बाकी है.

वही पुलिस है वही अदालत और वही हाकिम

तू है मुलज़िम तेरी ज़मानत होना अभी बाकी है.

वही ज़मीदार वही साहुकार और वही हैं चाटुकार

तेरे समाजवाद का होना अभी बाकी है.

वही बामनी नुस्ख़ें हैं और वही शेख़ की चाल

न हो जात जिसमें वो समाज होना अभी बाकी है.

वही ज़हनी सिलवटें है वही तारीकियों के जाल

चढ़ा दे सान पर जो हमें वो इंसान होना अभी बाकी है.

वही मसाईल हैं वही इस्तहसाल

वही भूख है वही ज़िंदगी बेहाल

वही शिकायतें हैं वही दहकते सवाल

ओ भगत सिंह, ओ भगत सिंह

तेरे इंकलाब का होना अभी बाकी है.

ओ भगत सिंह, ओ भगत सिंह

तेरे इंकलाब का होना अभी बाकी है.

जय युवा भारत