अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय महासभा

आज भी क्षत्रिय समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग ,राष्ट्र , एवं समाज कल्याण, के कार्यो में सयोंग करने के लिए तत्पर रहता है . इसी वर्ग की शक्ति के बल पर इस देश में हजारों क्षत्रिय संस्थाएं कार्य कर रही है , इसी वर्ग के धन एवं समय की शक्ति का उपयोग कर क्षत्रिय संस्थाए शासन में राजनैतिक भागीदारी प्राप्त करने के लिए महापुरुषों की जयंतियों , क्षत्रिय सम्मेलनों, एवं अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करती है एवं कुछ क्षत्रिय संस्थाए सम्पन्न क्षत्रियों का क्लव बनाकर सत्ता एवं समाज में दवाव समूह बनाये रखना चाहती है जिससे समाज का कोई स्थाई हित नहीं होने बाला हमें अपने क्षत्रिय धर्मं के अनुसार संपूर्ण मानव जाती के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए.
वर्तमान परिस्थियों को ध्यान में रखते हुए मूल्यांकन कर क्षत्रिय धर्मं की पुनः स्थापना करनी होगी , ताकि धर्मं व्यवसाय का कारण न बनकर समाज कल्याण का माध्यम बने , वर्तमान समय में क्षत्रिय समाज की संपूर्ण शक्ति को क्षणिक समाज कल्याण के कार्यो में न लगाकर दूरगामी एवं स्थायी परिणाम देने वाले कार्यक्रमों में लगाना होगी , तभी समाज कर्तव्यों के पथ पर अग्रसर होगा . क्षत्रिय समाज के जागृत होने से संपूर्ण मानव जाति अपने धर्मं का निर्वाह करेगी . तभी राम राज्य जेसी जन कल्याणकारी शासन व्यवस्था स्थापित की जा सकेगी और यह तभी संभव होगा जब क्षत्रिय धार्मिक द्रष्टि से एक जुट हो कर क्षत्रिय धर्मं की शक्ति का निर्माण करे . इसके तहत छत्तीस कुलो की कुल्देवियो एवं ईष्ट देवतायों का आवाहनयज्ञ कर उन्हें एक जगह स्थापित कर कुलदेवी धाम का निर्माण करें जहाँ वुजुर्गों के सरक्षण के लिए वृद्ध आश्रमों , गायों की रक्षा के लिए गोशालाए एवं क्षत्रिय समाज के विकाश के लिए चिकित्सा शिक्षा , इंजीनियरिंग एवं उच्च शिक्षा की व्यवस्था निशुल्क प्रदान की जाति हो ऐसे गुरुकुल स्थापित किये जाये तो यह हमारा क्षत्रिय धर्म जागरण एवं समाज कल्याण के लिए उठाया गया पहला , मजबूत एवं स्थाई कदम होगा, जिसके परिणाम स्वरूप संपूर्ण समाज के संचालन के शूत्र क्षत्रिय धर्मं के पालन करने बालो के हाथों में होगें
मुझे उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय महासभा का मिशन राजपूत इन एक्शन अपने पांच शूत्रिय उद्देश्यों ,समाज की धार्मिक एकता , निशुल्क शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण, आर्थिक उन्नति एवं राजनैतिक उत्थान, कुलदेवी मंदिरों के निर्माण से सफल होगा एवं क्षत्रिय समाज को नई दिशा देने के लिये मील का पत्थर साबित होगा। लेकिन क्षत्रिय समाज के बंधुओं को इस बात पर भी विचार करना होगा कि एकजुटता से ही हम अपने अतीत के वैभव और गौरव को हासिल कर सकते हैं । इसके लिये जरूरी है कि क्षत्रिय समाज का प्रत्येक व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय महासभा के इस मिशन मे सहभागी बने ।...............